गुजरात में बदल रही संयुक्त परिवार व्यवस्था, तेजी से बढ़ रहे वृद्धाश्रम
गुजरात में पारंपरिक संयुक्त परिवार (Joint family system) के स्वरूप में तेजी से बदलाव आ रहा है, जिसका सीधा असर बुजुर्गों के जीवन पर पड़ रहा है। संतानों के नौकरी, व्यवसाय या विदेश में बस जाने के कारण अकेले पड़ रहे माता-पिता के लिए ओल्ड एज होम (Old age homes) अब केवल बेसहारा लोगों की जगह नहीं रहे हैं। राज्य के प्रमुख शहरों में निजी, ट्रस्ट संचालित और प्राइवेट बंगलों में चलने वाले केयर सेंटरों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि आंकड़ों के अनुसार लगभग हर 5 दिन में एक नया सीनियर केयर होम आकार ले रहा है।
व्यवसायिक लिस्टिंग डेटा (Business listing data) के अनुसार, गुजरात में वर्तमान में लगभग 376 पंजीकृत वृद्धाश्रम, सीनियर लिविंग (Senior living) और असिस्टेड केयर सेंटर (Assisted care centers) सक्रिय हैं। अहमदाबाद इस नए ट्रेंड का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जहां अकेले शहर में करीब 86 संस्थाएं सूचीबद्ध हैं। इसके अलावा सूरत में 63, वडोदरा में 48 और राजकोट में 23 केंद्र काम कर रहे हैं। राज्य सरकार के समाज सुरक्षा विभाग (Social security department) के रिकॉर्ड भी पुष्टि करते हैं कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े इस क्षेत्र का दायरा तेजी से फैल रहा है।

