ગુજરાત

गुजरात में प्रदूषण का तांडવ, सांस के मरीजों में 40% का भारी इजाफा

सर्दियों की दस्तक के साथ ही गुजरात में प्रदूषण (Pollution) का स्तर खतरनाक तरीके से बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। अहमदाबाद जैसे महानगरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (Air Quality Index) पिछले कई दिनों से 200 के पार बना हुआ है, जिससे सांस के मरीजों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि हुई है। आपातकालीन सेवा ‘108’ (Emergency Service) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सांस की तकलीफ से संबंधित 1.29 लाख से अधिक कॉल दर्ज किए गए हैं, जो साल 2023 के मुकाबले लगभग 40 प्रतिशत अधिक हैं। इस सूची में अहमदाबाद सबसे ऊपर है, जहाँ श्वसन संबंधी समस्याओं (Respiratory Problems) के कारण 31 हजार से ज्यादा इमरजेंसी केस सामने आए हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली (Lifestyle) और दूषित हवा के कारण फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियाँ बढ़ रही हैं, जिनमें क्रोनिक ऑब्सट्रક્ટિવ પલ્મોનરી डिजीज (COPD) सबसे घातक है। सूरत और वडोदरा भी इस संकट की चपेट में हैं, जहाँ इमरजेंसी कॉल्स (Emergency Calls) की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि बाहर निकलते समय मास्क (Mask) पहनना अनिवार्य है, विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। प्रदूषण के इस बढ़ते स्तर ने सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है, जिससे निपटने के लिए अब व्यक्तिगत स्तर पर सावधानी बरતના बेहद जरूरी हो गया है।

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