अहमदाबाद की विडंबना: जनता पी रही गंदा पानी, अधिकारी डकारेंगे 1 करोड़ का ‘हाइजीनिक वॉटर’
अहमदाबाद नगर निगम के दावों के विपरीत शहर के मध्य, उत्तर और दक्षिण क्षेत्र की पोल तथा चाली इलाकों में रहने वाले लोग दशकों पुरानी पाइपलाइन के कारण दूषित पानी (Contaminated Water) पीने को मजबूर हैं। शहर के लगभग 150 से अधिक स्पॉट ऐसे हैं जहाँ 30 से 50 साल पुरानी ड्रेनेज और पानी की लाइनें आपस में मिल जाने के कारण घरों में बदबूदार और गंदा पानी आ रहा है। इस गंभीर समस्या (Serious Issue) के चलते स्थानीय लोगों में पेट दर्द और संक्रमण जैसी बीमारियां आम हो गई हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जहाँ आम जनता इस बदहाली से जूझ रही है, वहीं नगर निगम के अधिकारी अपने लिए 1 करोड़ रुपये के खर्च से हाइजीनिक पानी (Hygienic Water) की व्यवस्था करने में जुटे हैं, जो प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
नगर निगम प्रशासन (Municipal Administration) का तर्क है कि संकरी गलियों और मकानों के नीचे दबी इन लाइनों को बदलने के लिए निर्माण कार्य तोड़ना अनिवार्य है, जो एक जटिल प्रक्रिया है। हालांकि दो साल पहले तात्कालिक म्यूनिसिपल कमिश्नर ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए 300 करोड़ रुपये का पैकेज (Package) आवंटित किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर काम की गति अत्यंत धीमी है। जमालपुर, खाड़िया और शाहपुर जैसे घने इलाकों में ड्रेनेज बैक मारने और गंदे पानी की आपूर्ति (Water Supply) से नागरिक त्रस्त हैं। जानकारों के अनुसार इस कार्य को पूरा होने में अभी 2 से 3 साल का समय और लग सकता है, जिसका सीधा मतलब है कि हजारों परिवारों को अभी लंबे समय तक इस नरकीय स्थिति (Miserable Condition) का सामना करना पड़ेगा।

