ગુજરાતરાષ્ટ્રીય

संसद में गूंजा गुजरातकी शराबबंदी का मुद्दा, सांसद बोले- जब सरकार ही दे रही है परमिट (Permit), तो बैन का क्या मतलब?

गुजरात (Gujarat) में शराब (Liquor) और ड्रग्स (Drugs) के बढ़ते चलन को लेकर विपक्ष (Opposition) ने आक्रामक रुख अपनाया हुआ है, जिसे जनता का समर्थन भी मिल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा सरकार को बैकफुट (Backfoot) पर आना पड़ा है। अब गुजरात की शराबबंदी का मुद्दा सीधे संसद (Parliament) तक पहुँच गया है। राजस्थान (Rajasthan) के सांसदों के बाद अब दीव (Diu) के सांसद उमेश पटेल (Umesh Patel) ने संसद में इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधा आरोप लगाया है कि जब गुजरात सरकार खुद ही लोगों को शराब पीने के लिए परमिट (Permit) दे रही है, तो ऐसी शराबबंदी का क्या अर्थ है? उनके अनुसार, यह प्रतिबंध सिर्फ नाम के लिए है, क्योंकि गुजरात में गली-गली में शराब बिक रही है।

संसद (Parliament) में गुजरात की शराबबंदी के मुद्दे पर लगातार चर्चा होने से राज्य सरकार की फजीहत हुई है। उमेश पटेल (Umesh Patel) ने आरोप लगाया कि प्रतिबंध के बावजूद गुजरात में आज भी 77 होटलों (Hotels) और रिसॉर्ट्स (Resorts) में शराब बेची जा रही है। उन्होंने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गुजरात में ₹25,000-30,000 करोड़ का अवैध शराब का काला कारोबार (Black Business) फल-फूल रहा है, जिससे सरकारी खजाने (Treasury) को नुकसान हो रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि शराब पर लगी पाबंदी हटा दी जाए तो सरकार को बड़ी राजस्व (Revenue) आय हो सकती है। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद गेनीबेन ठाकोर ने भी संसद में इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि गुजरात में किसानों (Farmers) को खाद (Fertilizer) के लिए भटकना पड़ रहा है, लेकिन शराब की होम डिलीवरी (Home Delivery) आसानी से हो रही है। उन्होंने सरकार से किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने और कालाबाज़ारी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई (Strict Action) करने की मांग की।

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