अक्षरधाम केस में बड़ा मोड़: तीन आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी, नहीं मिले पुख्ता सबूत
गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर पर हुए भीषण आतंकवादी हमले के मामले में 17 जनवरी को विशेष पोटा कोर्ट (Pota Court) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने तीन आरोपियों—अजमेरी अब्दुल रशीद सुलेमान, मोहम्मद फारूक मोहम्मद हनीफ शेख और मोहम्मद यासीन भट्ट—को पुख्ता सबूतों के अभाव में डिस्चार्ज (Discharge) कर दिया है। पुलिस ने इन पर आरोप लगाया था कि इन्होंने हमले की योजना बनाने और हथियारों की आपूर्ति में मदद की थी, लेकिन सुनवाई के दौरान इनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इससे पहले भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने छह अन्य आरोपियों को निर्दोष घोषित किया था, जिन्हें निचली अदालतों ने फांसी और उम्रकैद जैसी सजाएं सुनाई थीं।
जांच अधिकारियों के अनुसार, यासीन भट्ट पर कश्मीर के अनंतनाग में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकियों के साथ मिलकर साजिश रचने और हथियारों को एंबेसडर कार में छिपाकर भेजने का आरोप था। पुलिस की चार्जशीट (Charge-sheet) में दावा किया गया था कि एके-47 और भारी मात्रा में गोला-बारूद इन्हीं माध्यमों से अहमदाबाद पहुँचाया गया था। हालांकि, विशेष कोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और तीनों को दोषमुक्त (Acquitted) कर रिहा करने का आदेश दिया। अक्षरधाम हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था, और अब कानूनी प्रक्रियाओं (Legal Procedures) के माध्यम से सबूतों की कमी के चलते आरोपियों का बरी होना सुरक्षा एजेंसियों की जांच शैली पर भी सवाल खड़े करता है।

