गांधीनगर का ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल: 15 साल पुराना कचरे का पहाड़ गायब, अब 10 एकड़ जमीन पर लहलहाएंगे 40,000 पेड़
गुजरात की राजधानी गांधीनगर ने पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नगर निगम ने सेक्टर-30 स्थित डंपिंग साइट पर पिछले 15 वर्षों से जमा लगभग 3.85 लाख मेट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method) से सफलतापूर्वक निपटान कर दिया है। इस महा-अभियान के चलते 10 एकड़ की बहुमूल्य भूमि अब पूरी तरह कचरा मुक्त हो गई है। प्रशासन ने इस खाली हुई जमीन पर ‘मियावाकी’ (Miyawaki) पद्धति से 40,000 पेड़ लगाने की योजना बनाई है। यह जापानी तकनीक कम जगह में बहुत तेजी से घने जंगल विकसित करने के लिए जानी जाती है, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता (Air Quality) में काफी सुधार होगा।
गांधीनगर नगर निगम ने कचरे के प्रबंधन को एक लाभकारी मॉडल (Profitable Model) में बदल दिया है। निगम ने गीले कचरे से वर्मीकम्पोस्ट विधि द्वारा 11.51 लाख किलो से अधिक उच्च गुणवत्ता वाला जैविक खाद (Organic Fertilizer) तैयार किया है, जिसे सरकारी नर्सरियों के माध्यम से बेचा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौती माने जाने वाले प्लास्टिक कचरे के निपटान हेतु भी एक अभिनव प्रयोग (Innovative Experiment) शुरू किया गया है। वर्ष 2025-26 के दौरान एकत्रित 1.27 लाख किलो प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल (Recycle) कर अब सरकारी और निजी इमारतों के निर्माण कार्यों में उपयोग किया जाएगा। गंदगी के ढेर से हरियाली की ओर यह प्रयास शहर के नागरिकों के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए एक सुखद बदलाव लेकर आएगा।

