हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय: बैंक नीलामी में खरीदी संपत्ति का होगा तुरंत रजिस्ट्रेशन, सरकारी अड़चनें खत्म
गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि बैंक नीलामी के जरिए खरीदी गई संपत्ति के लिए सरकारी अधिकारी बिक्री दस्तावेज या प्रमाण पत्र के पंजीकरण (Registration) से इनकार नहीं कर सकते हैं। जस्टिस हेमंत एम. प्रच्छक ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि बैंक ने उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए बिक्री प्रमाण पत्र (Sale Certificate) जारी कर दिया है, तो पंजीकरण अधिकारी ऐसे लेनदेन को दर्ज करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य (Bound) हैं। भले ही उस संपत्ति पर कोई पुराना सरकारी बोझ या बकाया बोल रहा हो, लेकिन नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद खरीदार के अधिकारों को रोका नहीं जा सकता। हाईकोर्ट ने भावनगर के एक मामले में अधिकारियों द्वारा पंजीकरण से इनकार करने के आदेश को रद्द (Quash) कर दिया और याचिकाकर्ता के पक्ष में कार्यवाही करने का निर्देश दिया।
यह मामला ‘मेसर्स राज पिक्चर हाउस’ की संपत्ति से जुड़ा है, जिसे 2013 में बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के पास गिरवी रखा गया था। जब मूल मालिक ऋण चुकाने में विफल रहा, तो बैंक ने सरफेसी एक्ट (SARFAESI Act) के तहत वसूली की कार्यवाही शुरू की और संपत्ति की नीलामी की। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब उन हजारों खरीदारों के लिए मार्ग प्रशस्त हो गया है जिन्होंने बैंक नीलामी में संपत्तियां खरीदी हैं लेकिन पंजीकरण न होने के कारण परेशान थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण (Securitization and Reconstruction) कानून के तहत की गई नीलामी के बाद, संबंधित अधिकारियों को संपत्ति के बिक्री दस्तावेजों और प्रमाण पत्रों का पंजीकरण बिना किसी विलंब के करना होगा। इस फैसले से बैंकिंग सेक्टर (Banking Sector) और रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

