केरल में कांग्रेस की ‘कांटों भरी’ जीत: मुख्यमंत्री पद के लिए सतीशन और वेणुगोपाल के बीच छिड़ी जंग, सड़कों पर उतरे हजारों कार्यकर्ता
केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की शानदार जीत के बाद अब मुख्यमंत्री का चुनाव करना पार्टी के लिए एक कठिन चुनौती (Challenge) बन गया है। राज्य भर में हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जिस नेता ने पिछले 5 वर्षों तक जमीनी स्तर पर संघर्ष (Ground Struggle) कर पार्टी को जीत दिलाई है, उसे ही सत्ता की कमान मिलनी चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल का नाम भी रेस में काफी आगे है। हालांकि, पार्टी कार्यकर्ता वेणुगोपाल को बाहरी नेता के रूप में देख रहे हैं और वे किसी भी हाल में सतीशन के अलावा किसी और को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के निर्वाचित 63 विधायकों में से अधिकांश वेणुगोपाल के पक्ष में हैं, जो केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ी उलझन (Confusion) पैदा कर रहा है। केरल की यह स्थिति साल 2006 के उस दौर की याद दिलाती है जब सीपीएम में वी.एस. अच्युतानंदन के लिए जनता सड़कों पर उतर आई थी और पार्टी को अपना फैसला बदलना पड़ा था। वर्तमान में भी कार्यकर्ता ‘सेकुलर केरल’ (Secular Kerala) के लिए सतीशन के नाम पर अड़े हुए हैं। यदि हाईकमान विधायकों की पसंद को तवज्जो देता है, तो उसे कार्यकर्ताओं के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कांग्रेस के लिए जीत का यह जश्न अब एक गंभीर राजनीतिक संकट (Political Crisis) में बदलता नजर आ रहा है, जिसका समाधान निकालना नेतृत्व के लिए आसान नहीं होगा।

