शेयर बाजार में हाहाकार: 26 महीने के निचले स्तर पर फिसला सेंसेक्स, निवेशकों के ₹9.43 लाख करोड़ स्वाहा, डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड ₹95 के पार
भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के लिए 30 मार्च का दिन बेहद निराशाजनक रहा। लगातार दूसरे सत्र में जारी भारी बिकवाली (Selling) के दबाव के कारण सेंसेक्स 26 महीनों में पहली बार 72,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। इस गिरावट से निवेशकों को एक ही दिन में लगभग 9.43 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। बाजार के इस पतन का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों का 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का रिकॉर्ड 95 के स्तर को पार करना माना जा रहा है। सेंसेक्स 1,635.67 अंक यानी 2.22% गिरकर 71,947.55 पर और निफ्टी 488.20 अंक यानी 2.14% की गिरावट के साथ 22,331.40 पर बंद हुआ। आरबीआई (RBI) के विदेशी मुद्रा संबंधी फैसलों के बाद बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी भारी बिकवाली (Sell-off) देखी गई, जिसने बाजार के सेंटिमेंट को और बिगाड़ दिया।
आंकड़ों के अनुसार, 14 फरवरी 2024 के बाद यह पहली बार है जब सेंसेक्स 72 हजार के नीचे बंद हुआ है, जो बाजार में मंदी (Recession) के गहरे संकेतों को दर्शाता है। मार्च के महीने में निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में लगभग 10.5% की गिरावट दर्ज की गई है, जो मार्च 2020 के कोरोना संकट के बाद का सबसे खराब प्रदर्शन है। बाजार में गिरावट का एक और प्रमुख कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Investors) द्वारा की जा रही रिकॉर्ड 12.3 बिलियन डॉलर की मासिक निकासी है। लगभग 3,419 शेयरों के दाम गिरने से बाजार में चौतरफा हाहाकार मच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की उच्च कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों के मनोबल (Morale) को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है।

