भारत की कूटनीतिक पहल: रूस से सस्ता तेल खरीदने के लिए अमेरिका से मांगी और छूट
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और तेल आपूर्ति में पैदा हुए संकट के बीच भारत ने अमेरिका से रूस से तेल खरीदने के लिए दी गई विशेष छूट (Waiver) को बढ़ाने की अपील की है। इस छूट की वर्तमान अवधि 16 मई 2026 को समाप्त होने वाली है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। भारत ने वाशिंगटन को स्पष्ट संकेत दिया है कि तेल बाजार में आने वाली अस्थिरता (Instability) को रोकने के लिए रूस से होने वाला आयात जारी रहना बेहद जरूरी है। इस बीच, ब्रिक्स देशों की बैठक से पहले रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भरोसा दिलाया है कि रूस भारत की ऊर्जा जरूरतों का पूरा सम्मान करेगा और हाइड्रोकार्बन, गैस व तेल की सप्लाई निरंतर जारी रखेगा।
आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में भारत ने रिकॉर्ड स्तर पर रूसी तेल का आयात (Import) किया है, जो औसतन 19 लाख बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है। यूक्रेन युद्ध के बाद से अमेरिका लगातार भारत पर रूस से व्यापार कम करने का दबाव बना रहा है, लेकिन ईरान-अमेरिका संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में संकट की स्थिति बनी हुई है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत के लिए रूस से मिलने वाला रियायती कच्चा तेल (Crude Oil) घरेलू ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बन गया है। भारत और रूस के बीच कुडनकुलम परमाणु संयंत्र जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी सहयोग जारी है, जो दोनों देशों के मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों (Bilateral Relations) को दर्शाता है।

