गुजरात में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुली: दो साल में 12,700 लोग एचआईवी की चपेट में, 800 से अधिक गर्भवती महिलाएं भी संक्रमित
राज्य सरकार की ‘नंबर वन’ गुजरात की छवि के बीच स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों ने एक डरावनी तस्वीर पेश की है। आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रखने के सरकारी दावों के बावजूद, पिछले दो वर्षों में राज्य में केवल 801 गर्भवती महिलाएं ही नहीं, बल्कि कुल 12,700 लोग एचआईवी (HIV) की चपेट में पाए गए हैं। नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन और राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी द्वारा संचालित पब्लिक हेल्थ मिशन (Public Health Mission) के प्रयास विफल होते दिख रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में करीब 20.54 लाख लोगों का परीक्षण किया गया था, जिसमें से 7762 लोग संक्रमित पाए गए। यह स्थिति दर्शाती है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी इस घातक वायरस के प्रसार को रोकने में सफलता नहीं मिल रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान भी 13.27 लाख लोगों के टेस्ट (Test) किए गए, जिनमें से 4938 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सबसे ज्यादा चिंता का विषय गर्भवती महिलाओं का संक्रमण है; पिछले दो वर्षों में 23 लाख महिलाओं की जांच की गई, जिसमें से 807 सघन गर्भवती माताएं एचआईवी वायरस से संक्रमित पाई गईं। यह ‘माता-पिता से बच्चे में संक्रमण’ (Parent-to-child transmission) रोकने के सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग लगातार जागरूकता अभियान चलाने की बात कर रहा है, लेकिन धरातल पर एचआईवी के मरीजों की बढ़ती संख्या एक बड़ी चुनौती बन गई है। यदि समय रहते संक्रमण के इन लक्षणों (Symptoms) पर काबू नहीं पाया गया, तो भविष्य में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

