शिक्षकों का हल्लाबोल: पुरानी पेंशन और टेट-टैट परीक्षा से मुक्ति के लिए गुजरात भर में उग्र प्रदर्शन
गुजरात के शिक्षा जगत में इन दिनों अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकारी और नगर निगम संचालित स्कूलों के शिक्षकों का भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। राज्य में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करने और वरिष्ठ शिक्षकों के लिए अनिवार्य की गई टेट-टैट (TET/TAT) परीक्षाओं से पूर्ण मुक्ति पाने के लिए पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में अहमदाबाद, पंचमहाल और छोटाउदईपुर सहित कई जिलों में हजारों की संख्या में पहुंचे शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट कार्यालयों (Collector Offices) का घेराव कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) स्कूल बोर्ड के सैकड़ों शिक्षकों ने एक विशाल रैली निकालकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का तर्क है कि साल 2005 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा छीन ली गई है, जिसे बहाल किया जाना चाहिए। साथ ही, वर्ष 2010 से पहले सेवा में शामिल हुए अनुभवी शिक्षकों के प्रमोशन को इस परीक्षा के बहाने रोकना पूरी तरह से अनुचित है। अहमदाबाद में शांतिपूर्ण धरने के लिए लगाए गए टेंट को पुलिस द्वारा जबरन हटाए जाने के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण (Tense) हो गया।
दूसरी तरफ, पंचमहाल जिले के गोधरा स्थित जिला सेवा सदन और सर्किट हाउस परिसर के बाहर भी शिक्षकों का एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जमावड़ा देखने को मिला। वहां लगभग 1000 से अधिक शिक्षक हाथों में सरकार विरोधी नारे लिखे प्ले-कार्ड्स (Placards) और बैनर लेकर रैलियों में शामिल हुए और एडिशनल कलेक्टर को अपना मांग पत्र सौंपा। जिला शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में सरकार को अल्टीमेटम (Ultimatum) दिया है कि यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन भविष्य में और अधिक उग्र रूप धारण कर लेगा। वर्तमान में पूरे गुजरात में एक साथ उठे इस विरोध के बवंडर के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यदि गांधीनगर से कोई संवेनदनशील प्रतिक्रिया नहीं आती है, तो आने वाले दिनों में पूरे राज्य में स्कूलों में तालाबंदी और बड़े पैमाने पर शैक्षणिक कार्य बहिष्कार (Strike) होने की पूरी संभावना नजर आ रही है।

