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गुजरात हाई कोर्ट ने अपने ही फैसले पर लगाया 3 महीने का स्टे, अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे दोषी

अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट (Serial Bomb Blast) मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है, जहां गुजरात हाई कोर्ट ने अपने ही मुख्य फैसले के कार्यान्वयन पर 3 महीने का अंतरिम स्थगन (Stay) लगा दिया है। इससे पहले, कोर्ट ने साल 2022 में विशेष अदालत (Special Court) द्वारा सुनाई गई 38 आतंकवादियों की मौत की सजा और 11 अन्य दोषियों को आखिरी सांस तक आजीवन कारावास की सजा को पूरी तरह बरकरार रखने का आदेश दिया था। इस कड़े फैसले के तुरंत बाद, बचाव पक्ष के वकीलों ने देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपील दायर करने के लिए वैधानिक समय की मांग की थी। अदालत ने दोषियों की इस कानूनी दलील को स्वीकार करते हुए अपने आदेश के अमल पर तीन महीने की रोक लगा दी है, जिससे अब दोषियों को हाई कोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती देने का पर्याप्त अवसर मिल जाएगा।

गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद के 20 अलग-अलग संवेदनशील स्थानों पर हुए 21 सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था, जिसमें 56 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल (Injured) हुए थे। इस जघन्य मामले की लंबी सुनवाई के बाद निचली अदालत ने भारतीय न्यायशास्त्र के इतिहास में पहली बार एक साथ रिकॉर्ड 38 आरोपियों को मृत्युदंड (Capital Punishment) की सजा सुनाई थी। इस ऐतिहासिक फैसले की पुष्टि के लिए राज्य सरकार ने जहां हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, वहीं दूसरी ओर सजायाफ्ता आरोपियों ने भी इस फैसले के खिलाफ अपील (Appeal) की थी। फिलहाल, हाई कोर्ट के इस नए स्थगन आदेश के कारण आगामी तीन महीनों तक सजा के अमल पर रोक रहेगी और पूरा मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत के अधिकार क्षेत्र में स्थानांतरित होने जा रहा है।

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