ગુજરાતરાષ્ટ્રીય

गुजरात के 15 हजार करोड़ के नमकीन उद्योग में मचा हड़कंप

गुजरात के पैकेज्ड फूड उद्योग (Packaged food industry) में सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नए नियमों को लेकर हलचल तेज हो गई है। जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर लाल रंग का चेतावनी लेबल (Warning label) लगाने के मुद्दे पर सख्त सवाल पूछे हैं। गुजरात में लगभग 15,000 करोड़ रुपये का नमकीन और फरसाण का कारोबार फैला हुआ है, जिसमें 50,000 से अधिक दुकानें और 5,000 बड़ी ऑटोमेटेड फैक्ट्रियां शामिल हैं। इसके अलावा करीब 1.5 लाख से अधिक छोटे और गृह उद्योग (Cottage industries) भी इससे जुड़े हुए हैं। FSSAI के नए प्रस्ताव के तहत यदि किसी खाद्य उत्पाद में चीनी, नमक या वसा की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होगी, तो उसके पैकेट पर लाल स्वास्थ्य चेतावनी छपवानी अनिवार्य हो सकती है।

इस नए नियम को लेकर स्थानीय खाद्य निर्माताओं (Food manufacturers) में चिंता व्याप्त है। उनका मानना है कि यदि वे कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत नमक या तेल की मात्रा घटाते हैं, तो गुजराती व्यंजनों का पारंपरिक तीखा और चटपटा स्वाद (Flavor) प्रभावित होगा। वहीं दूसरी ओर, यदि वे स्वाद बनाए रखते हैं तो पैकेट के मुख्य भाग पर ‘High Salt’ या ‘High Fat’ का लाल लेबल लगाना पड़ेगा, जिसे देखकर ग्राहक उत्पाद खरीदने से कतरा सकते हैं। इससे बाजार में बिक्री घटने का बड़ा डर सता रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह भी सख्त हिदायत दी है कि कंपनियां स्वाद बनाए रखने के लिए किसी भी हानिकारक कृत्रिम रसायन या प्रिजर्वेटिव (Preservatives) का इस्तेमाल न कर सकें।

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