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ट्रम्प प्रशासन का बड़ा फैसला, H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस बढ़ी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने H-1B वीजा (H-1B Visa) को लेकर एक बेहद कड़ा फैसला लेते हुए 1,00,000 डॉलर की भारी-भरकम फीस वसूलने के आदेश को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। इस फैसले का सीधा असर भारतीय टेक प्रोफेशनल्स (Tech professionals) और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों पर पड़ने की आशंका है। इसके अलावा 18 सितंबर 2026 को जारी नए आदेश में वीजा के उपयोग पर कड़ा नियंत्रण और जांच रखने का निर्देश दिया गया है। विशेष रूप से ऐसी आउटसोर्सिंग फर्मों (Outsourcing firms) को जांच के दायरे में रखा जाएगा, जिन पर कम वेतन देकर विदेशी कर्मचारियों को रखने और स्थानीय अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां प्रभावित करने का आरोप है।

H-1B वीजा व्यवस्था के तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल और उच्च शिक्षा (Specialized skills) वाले विदेशी विशेषज्ञों को अपने यहां रोजगार प्रदान करती हैं। ट्रम्प प्रशासन द्वारा 2025 में लागू की गई यह 1 लाख डॉलर की फीस पहले की तुलना में बेहद ज्यादा है, जो पहले महज 2000 से 5000 डॉलर के बीच हुआ करती थी। हालांकि, इस फीस वृद्धि को लेकर अमेरिकी अदालतों (US courts) में कानूनी लड़ाई भी चल रही है। नए दिशानिर्देशों का मुख्य उद्देश्य आईटी क्षेत्र में निष्पक्षता लाना और टेक कंपनियों द्वारा किए जाने वाले वीजा दुरुपयोग को रोकना है, ताकि स्थानीय कर्मचारियों के अधिकारों का संरक्षण किया जा सके।

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