दिल्ली में इंटरनेट बंद करने पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, कदम का किया बचाव
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद (Mobile internet shutdown) करने के फैसले का केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा (Affidavit) दायर कर बचाव किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था (Public order) बनाए रखने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए 9 और 10 अक्टूबर 2026 के दौरान रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे के लिए इंटरनेट बंद करना बेहद जरूरी था। हालांकि, कोर्ट के आदेशों के कथित उल्लंघन के मामले में सरकार ने बिना शर्त माफी (Unconditional apology) मांगते हुए केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को जारी अवमानना नोटिस (Contempt notice) को वापस लेने का अनुरोध किया है।
केंद्र ने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन के दौरान केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित की गई थीं, जबकि वाई-फाई (Wi-Fi) और ब्रॉडबैंड (Broadband services) जैसी गैर-मोबाइल सेवाएं पूरी तरह चालू थीं। सरकार ने कहा कि बिना किसी पूर्व अनुमति के प्रदर्शन की घोषणा के कारण स्थिति बिगड़ सकती थी, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया। सरकार ने 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए अदालत से अपने 11 अक्टूबर के आदेश में संशोधन करने का भी आग्रह किया है, ताकि विशेष और आपातकालीन परिस्थितियों में तय सुरक्षा मानकों के तहत सीमित क्षेत्रों में इंटरनेट बंद करने की अनुमति बनी रहे।

