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महाशिवरात्रि अर्थात् महायोग : डॉ सुनीता शर्मा “शानू”

सृष्टि की उत्पत्ति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदि स्त्रोत हैं। और यह महाकाल ही योग- शास्त्र और ज्योतिष- शास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है किंतु वे लय और प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं।

हिंदू धर्म में “शिव” धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक है। वेद में इनका नाम “रूद्र” है। यह व्यक्ति की चेतना के अंतर्यामी है। इनकी अर्धांगिनी शक्ति का नाम पार्वती हैं।शिव और शक्ति दोनों के बीच के मिलन ( विवाह) का पर्व ही “महाशिवरात्रि” के नाम से विख्यात हैं।

संपूर्ण सृष्टि शिवमय है। मनुष्य अपने कर्मानुसार ही फल पाते हैं अर्थात स्वस्थ बुद्धि वालों को वृष्टि- जल ,अन्नादि भगवान शिव प्रदान करते हैं और दुर्बुद्धि वालों को व्याधि, दुख एवं मृत्यु आदि का विधान भी शिव ही करते हैं।

“महादेव” को आदि योगी भी कहा गया है। मानव जीवन में सार्थक – जीवन “मोक्ष” को कहा गया है। भगवान महादेव ने जो उपदेश माता पार्वती को दिया वह 112 ध्यान के सूत्र “विज्ञान भैरव तंत्र “के नाम से जाना जाता है। शिव का साकार रूप योगमय है। योग का अर्थ है मन ,आत्मा और शरीर का सामंजस्य होना अर्थात जोड़ना। अपनी इंद्रियों पर संयम रखना ही योग है।

गांधीनगर (गुजरात) स्थित “योगास्थली हेल्थ एंड वैलनेस” की संचालिका और संस्थापिका डॉ सुनीता शर्मा ने शिवरात्रि के पावन पर्व पर अपने प्रातः कालीन, एवं सांय कालीन योग कक्षाओं में ऑनलाइन महिलाओं और बच्चों को महामृत्युंजय मंत्र के साथ प्राणायाम, ध्यान और योगाभ्यास करवाया।

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