ગુજરાત

जीरो टॉलरेंस: गुजरात में अवैध खनिज परिवहन पर लगाम, अब सरकार लेगी अंतिम फैसला

गुजरात के खनिज विभाग ने नए वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन करने वालों के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ दी है। नए नियमों के अनुसार, अब यदि कोई डंपर, ट्रक या ट्रैक्टर अवैध खनिज ले जाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे कम से कम 30 दिनों तक ज़ब्त (Seize) रखा जाएगा। पहले केवल निर्धारित दंड (Penalty) भरकर वाहन तुरंत छूट जाते थे और पुनः उसी गतिविधि में शामिल हो जाते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था पूरी तरह बंद कर दी गई है। जप्ती के शुरुआती 10 दिनों तक तो वाहन छुड़ाने के लिए कोई आवेदन (Application) भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस अवधि के दौरान वाहन के इतिहास और मालिक की पहचान की विस्तृत जांच (Investigation) की जाएगी, जिसके बाद ही समाधान की प्रक्रिया शुरू होगी।

सरकार ने सबसे कड़ा प्रहार बार-बार अपराध दोहराने वालों पर किया है; यदि कोई वाहन तीसरी बार अवैध गतिविधियों में पकड़ा जाता है, तो उसे हमेशा के लिए सरकार के अधीन यानी राज्यसात (Confiscate) कर लिया जाएगा। इस निर्णय से खनिज माफियाओं के बीच भारी डर व्याप्त हो गया है, जबकि वैध खनन करने वाले व्यापारियों ने इस कदम का स्वागत किया है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इन कड़े नियमों के कारण खनिज विभाग के फील्ड स्टाफ पर दबाव बढ़ेगा और भ्रष्टाचार (Corruption) की आशंका भी बनी रहेगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगाना और राज्य की प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित (Secure) रखना है। इस सख्त नीति से सरकारी राजस्व (Revenue) में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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