गुजरात हाईकोर्ट की सरकार को कड़ी फटकार: “दूसरे फेज में ही 10 लाख आवेदन? सोचिए राज्य में बेरोजगारी का क्या आलम है”
गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य में दंगों के दौरान होने वाले नुकसान और पुलिस की भूमिका पर दायर एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation) की सुनवाई के दौरान बेरोजगारी के मुद्दे पर तीखी टिप्पणी की है। जब राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पुलिस भर्ती के दूसरे चरण (Phase-2) के लिए 10 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, तो मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि यह आंकड़ा राज्य में व्याप्त गंभीर बेरोजगारी (Unemployment) को दर्शाता है। अदालत ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि पुलिस बल में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया को बिना रुके निरंतर (Continuous) जारी रखा जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब मई में तय की गई है, जिसमें सरकार को प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।
सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 10,902 कांस्टेबल पदों में से 9,724 उम्मीदवारों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है, जबकि शेष उम्मीदवारों के जाति प्रमाणपत्रों (Caste Certificates) का सत्यापन अभी चल रहा है। वहीं, 472 पीएसआई (PSI) पदों के लिए हुई लिखित परीक्षा में 86,727 उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिनका परिणाम दिसंबर में घोषित किया जा चुका है। वर्तमान में उत्तर पुस्तिकाओं की पुनरावृत्ति (Re-checking) की प्रक्रिया गति में है, जिसे मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हाईकोर्ट ने चयन प्रक्रिया (Selection Process) में पारदर्शिता बरतने और इसे समय सीमा के भीतर पूरा करने की ताकीद की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके और योग्य युवाओं को जल्द रोजगार मिल सके।

