રાષ્ટ્રીય

सीमाओं पर भारत का चक्रव्यूह: 6 बड़ी रणनीतिक सुरंगों को मिली मंजूरी, चीन-पाक की बढ़ेगी टेंशन

भारत सरकार चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं की सुरक्षा को पुख्ता (Secure) करने के लिए रणनीतिक सुरंगों (Strategic Tunnels) का एक विशाल नेटवर्क तैयार करने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक बनने वाली छह बड़ी सुरंग परियोजनाओं को फास्ट ट्रैक (Fast Track) पर लाने के निर्देश दिए हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट में सबसे महत्वपूर्ण लद्दाख की 4.1 किलोमीटर लंबी ‘शिंकु ला’ टनल है, जो 15,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग होगी। इसके निर्माण से लद्दाख को निम्मू-पदम-दारचा मार्ग के जरिए एक ऐसा वैकल्पिक रास्ता (Alternative Route) मिलेगा, जो हर मौसम में सेना और नागरिकों के लिए खुला रहेगा। यह मार्ग सीमा से सुरक्षित दूरी पर होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और सुरक्षित माना जा रहा है।

अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में बनने वाली सुरंगें भारतीय सेना के लिए गेम-चेंजर (Game-Changer) साबित होंगी, क्योंकि इनके जरिए भारी तोपखाने और मिसाइल सिस्टम को सैटेलाइट की नजरों से बचाकर सीधे एलएસી (LAC) तक पहुंचाया जा सकेगा। जम्मू-कश्मीर में भी अनंतनाग और किश्तवाड़ को जोड़ने वाली ‘सिंथन टॉप’ ट्विन टनल का काम अंतिम चरण में है, जो भारी बर्फबारी के दौरान भी संपर्क (Connectivity) बनाए रखेगी। केवल उत्तर ही नहीं, बल्कि दक्षिण में केरल के वायनाड और मलप्पुरम के बीच भी पर्यावरण के अनुकूल ‘इको-सेंसिटिव’ (Eco-Sensitive) सुरंग बनाई जाएगी, जिससे हाथियों के कॉरिडोर को कोई नुकसान न पहुंचे। सरकार के इस आक्रामक दृष्टिकोण से भारत की रक्षात्मक और आर्थिक स्थिति दोनों को भविष्य में बड़ी मजबूती (Strength) मिलने की उम्मीद है।

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