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गुजरात में ईंधन संकट: मिडिल ईस्ट वॉर के असर से पेट्रोल-डीजल की सप्लाई प्रभावित, अफवाहों के बीच पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड और भारी भीड़

मिडिल ईस्ट में चल रहे भीषण युद्ध के कारण कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई (Supply) पर गहरा असर पड़ा है, जिसका सीधा प्रभाव गुजरात के प्रमुख शहरों में देखने को मिल रहा है। अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और देवभूमि द्वारका जैसे क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत महसूस की जा रही है। सप्लाई में कमी और भुगतान संबंधी देरी (Payment Delay) के कारण कई पेट्रोल पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लटक गए हैं। अहमदाबाद में ईंधन खत्म होने की अफवाह फैलने के बाद लोग घबराहट में बड़ी संख्या में पंपों पर उमड़ पड़े, जिससे कई इलाकों में ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) जैसी स्थिति पैदा हो गई। हालांकि, आधिकारिक जानकारी के अनुसार ईंधन की पूरी कमी नहीं है, बल्कि डिलीवरी समय पर न होने के कारण कुछ पंपों को अस्थायी रूप से बंद (Temporarily Closed) रखना पड़ा है।

पेट्रोल पंपों पर अचानक बढ़ी इस भीड़ के कारण अहमदाबाद के एस.जी. हाईवे और अन्य मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें सड़कों तक पहुंच गईं, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। एक तरफ ईंधन पाने की होड़ और दूसरी तरफ भीषण गर्मी (Scorching Heat) ने वाहन चालकों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। वडोदरा में भी निजी पंपों पर सप्लाई कम होने के कारण लोग सरकारी केंद्रों की ओर भाग रहे हैं, जिससे वहां ‘पैनिक बाइंग’ की स्थिति बन गई है। प्रशासन की ओर से लोगों को धैर्य रखने और सोशल मीडिया (Social Media) पर चल रही अफवाहों से बचने की सलाह दी जा रही है। फिलहाल, रसद विभाग तेल कंपनियों के साथ समन्वय कर रहा है ताकि ईंधन की रसद (Logistics) को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके और जनता को इस संकट से राहत मिल सके।

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