शंकराचार्य का बड़ा ऐलान: सनातन की रक्षा के लिए बनेगी ‘चतुरंगिणी सेना सभा’, आत्मरक्षा के लिए ‘परशु’ और ‘रोको, टोકો, ठोकों’ का दिया नारा
वाराणसी के विद्यामठ आश्रम में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सनातन प्रतीकों की रक्षा और हिंदू समाज में सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करने के लिए ‘चतुरंगिणी सेना सभा’ के गठन की घोषणा की है। शंकराचार्य के अनुसार, समाज में व्याप्त भय को दूर करने और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए यह संगठन एक मजबूत संरचना (Structure) प्रदान करेगा। इस पहल के तहत प्राथमिक चरण में 27 सदस्यों की एक टीम बनाई गई है, जो अगले 10 महीनों में संगठन के विस्तार, भर्ती और प्रशिक्षण (Training) के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार करेगी। इस अवसर पर उन्होंने ‘रोको, टोको और ठोको’ का नारा दिया, जिसकी व्याख्या करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘ठोको’ का अर्थ शारीरिक हिंसा नहीं, बल्कि अन्याय करने वालों के विरुद्ध कड़वी कानूनी और संवैधानिक कार्रवाई (Action) करना है।
इस सेना का ढांचा प्राचीन सैन्य व्यवस्था (Ancient Military System) पर आधारित होगा, जिसमें ‘पत्ती’ को सबसे छोटी इकाई मानकर भविष्य में लाखों सदस्यों वाली ‘अक्षयवर्णी सेना’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सभा के सदस्यों को प्रतीकात्मक रूप से या आत्मरक्षा (Self-defense) के लिए ‘परशु’ (फरसा) देने की बात भी सामने आई है। शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि यदि सरकार नागरिकों की सुरक्षा करने में विफल रहती है, तो लोगों को अपनी रक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने मथुरा में संत की हत्या और गौरक्षकों पर होने वाले हमलों का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था (Law and Order) पर भी सवाल उठाए। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य किसी धर्म के विरुद्ध आक्रामकता फैलाना नहीं, बल्कि हिंदू समाज में आत्मविश्वास (Confidence) बढ़ाना और जरूरत के समय उनके साथ खड़े रहना है।

