PM मोदी का विजन: 1% से 20% तक पहुँचा एथेनॉल ब्लेंडिंग (Blending), अब 4.5 करोड़ बैरल तेल की होगी बचत
दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को पुख्ता करने के लिए एथेनॉल पर बड़ा दांव लगा रहा है। ‘ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन’ (AIDA) ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण को 20% से बढ़ाकर 30% (E30) करने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान एथेनॉल के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि एक दशक पहले पेट्रोल में मात्र 1-2% एथेनॉल मिलाया जाता था, जो अब बढ़कर 20% हो गया है। इस उपलब्धि के कारण भारत को हर साल लगभग 4.5 करोड़ बैरल कम कच्चा तेल आयात (Import) करना पड़ता है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार की भारी बचत हो रही है।
एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि पश्चिम एशिया के युद्ध जैसे संकटों से बचने के लिए भारत को एथेनॉल के उत्पादन और उपयोग को युद्ध स्तर पर बढ़ाना चाहिए। इसके तहत फ्लेक्स-फ्यूअल (Flex-Fuel) वाहनों को बढ़ावा देने की मांग की गई है, जो पूरी तरह से एथेनॉल पर चल सकें। एथेनॉल का अधिक उपयोग न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत (Source) भी बन गया है, विशेषकर गन्ना और अनाज उगाने वाले किसानों के लिए। इसके अतिरिक्त, एथेनॉल को केवल वाहनों तक सीमित न रखकर इसे रसोई में एथेनॉल-आधारित बर्नर (Burner) के रूप में उपयोग करने का भी प्रस्ताव दिया गया है। सरकार की इस रणनीति (Strategy) का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना और वैश्विक तेल संकट के प्रभाव से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखना है।

