गुजरात में 1867 सरकारी अधिकारियों पर गिरी गाज, सतर्कता आयोग की रिपोर्ट के बाद 246 का पेंशन रोका गया
गुजरात सतर्कता आयोग (Vigilance Commission) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 से 2024 के बीच राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत 1867 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के लिए दंडित किया गया है। आयोग द्वारा की गई गहन जांच (Investigation) के बाद दोषी पाए गए इन लोक सेवकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। अकेले वर्ष 2024 में, कुल 486 कर्मियों को सजा के आदेश दिए गए, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि क्लास-1 श्रेणी के 138 उच्चाधिकारियों के खिलाफ कड़े दंडात्मक आदेश पारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में शामिल 246 कर्मचारियों का पेंशन (Pension) रोकने का आदेश भी जारी किया गया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
आयोग की कार्यप्रणाली (Methodology) के अनुसार, वर्ष 2024 के दौरान कुल 1382 लोक सेवकों के विरुद्ध विभिन्न प्रकार की सिफारिशें सरकार को भेजी गई थीं। इसमें से 678 कर्मचारियों के खिलाफ ‘भारी दंड’ (Major Penalty) और 54 कर्मियों के खिलाफ ‘हल्की सजा’ की सिफारिश की गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की रिपोर्ट के आधार पर 29 अधिकारियों के विरुद्ध फौजदारी मुकदमा यानी प्रोसीक्यूशन (Prosecution) चलाने की मंजूरी भी दी गई है। हालांकि, आयोग ने निष्पक्षता बरतते हुए 588 ऐसे कर्मचारियों के मामलों को बंद (Dropped) करने का सुझाव भी दिया है, जिनके खिलाफ लगे आरोपों में कोई ठोस तथ्य नहीं पाए गए। सतर्कता आयोग का यह कदम राज्य में पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करने और सरकारी तंत्र से भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

