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मिडल ईस्ट जंग का अंत करीब? अमेरिका ने ईरान की कमर तोड़ने का किया दावा, अब खाड़ी देशों से युद्ध का हर्जाना वसूलने की तैयारी में ट्रंप

मिडल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष को एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, जिसमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि आगामी कुछ ही हफ्तों में इस युद्ध का अंत हो सकता है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को होर्मुज जलડમરુમધ્ય (Strait of Hormuz) पर किसी भी तरह का स्थाई कब्जा या टोल सिस्टम चलाने की अनुमति नहीं देंगे। अमेरिका का दावा है कि उनके हमलों ने ईरान की नौसेना और मिसाइल बनाने की क्षमता (Capacity) को जड़ से हिला दिया है। रुबियो ने ईरानी जनता की प्रशंसा की लेकिन वहां के वर्तमान शासन को दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या (Problem) बताया है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में वहां कोई तर्कसंगत नेतृत्व आता है, तो यह वैश्विक शांति के लिए शुभ संकेत होगा।

दूसरी तरफ, व्हाइट हाउस (White House) की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक चौंकाने वाला संकेत दिया है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस युद्ध का वित्तीय बोझ अब खाड़ी देशों पर डालने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप की पिछली नीतियों को देखते हुए यह संभावना प्रबल है कि युद्ध में हुए भारी खर्च की वसूली इन तेल समृद्ध देशों से की जाएगी। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक मास्टर प्लान (Master Plan) सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ट्रंप प्रशासन का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा का मूल्य वहां के संपन्न देशों को चुकाना चाहिए। अमेरिका अब अपनी सैन्य उपस्थिति को सीमित करने और अपने रणनीतिक उद्देश्यों (Strategic Objectives) को जल्द से जल्द हासिल करने की दिशा में बढ़ रहा है। इस नई नीति ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) में एक नई बहस छेड़ दी है।

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