ट्रंप का दो-टूक जवाब: ‘होर्मुज से तेल चाहिए तो खुद दिखाओ हिम्मत’, अमेरिका अब नहीं करेगा मदद
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के 32वें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी को लेकर पूरी दुनिया को कड़ी चेतावनी (Warning) दी है। ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद किए जाने से वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई (Supply) पूरी तरह चरमरा गई है। इस स्थिति पर ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि जो देश ईरान के खिलाफ खड़े होने से डर रहे हैं, उन्हें अब अपनी सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों के लिए खुद लड़ना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब उन देशों की मदद के लिए वहां मौजूद नहीं रहेगा, जिन्होंने संकट के समय अमेरिका का साथ नहीं दिया। ट्रंप ने विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों का नाम लेते हुए कहा कि यदि उन्हें जेट फ्यूल (Jet Fuel) चाहिए, तो वे या तो अमेरिका से खरीदें या फिर खुद हिम्मत दिखाकर होर्मुज जलमार्ग में जाकर अपना हक हासिल करें।
ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका अब इस युद्ध में अन्य देशों की सक्रिय भागीदारी (Involvement) चाहता है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान को पहले ही बुनियादी रूप से तबाह (Devastated) कर दिया गया है और अब ‘मुश्किल काम’ पूरा हो चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से दुनिया को संदेश दिया कि अब ‘मुफ्त की सुरक्षा’ का दौर खत्म हो गया है और हर राष्ट्र को अपने हितों के लिए खुद युद्ध के मैदान में उतरना होगा। अमेरिका के इस आक्रामक रुख ने खाड़ी देशों और पश्चिमी सहयोगियों के बीच भारी अनिश्चितता (Uncertainty) पैदा कर दी है। ट्रंप की इस ‘लड़ो और हासिल करो’ की नीति ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका अब वैश्विक पुलिसकर्मी की भूमिका से पीछे हटकर ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) की रणनीति पर मजबूती से काम कर रहा है।

