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इसरो रचेगा इतिहास: अंतरिक्ष से सीधे जमीन पर उतरेगा रॉकेट, ‘लैंडिंग लेग’ बनाने की तैयारी शुरू

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने रीयूजेबल रॉकेट (Reusable Rocket) प्रोग्राम की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ‘वर्टिकल टेक-ऑफ और वर्टिकल लैंडिंग’ (VTVL) तकनीक के लिए महत्वपूर्ण टेंडर जारी किया है। इस परियोजना के तहत इसरो अपने ‘एडमिर’ (ADMIRE) टेस्ट वाहन के लिए विशेष ‘लैंडिंग लेग’ हार्डवेयर (Landing Leg Hardware) विकसित करने जा रहा है। यह तकनीक बिल्कुल वैसी ही है जैसी एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) इस्तेमाल करती है, जिसमें रॉकेट लॉन्च होने के बाद वापस जमीन पर सीधा खड़ा होकर लैंड करता है। इस स्वदेशी तकनीक के सफल होने से भविष्य के स्पेस मिशन (Space Missions) की लागत में भारी कमी आएगी, क्योंकि रॉकेट के महंगे हिस्सों को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। वर्तमान में भारतीय रॉकेट मिशन के बाद समुद्र में गिरकर नष्ट हो जाते हैं, लेकिन नई प्रणाली से वे सुरक्षित वापस लौट सकेंगे।

इसरो (ISRO) का यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तीन चरणों में विभाजित है और इसे लगभग 12 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पहले चरण (Phase-0) में कच्चे माल की खरीद, निर्माण प्रक्रिया का सत्यापन और क्वालिटी कंट्रोल (Quality Control) जैसे कार्यों को चार महीने के भीतर पूरा किया जाएगा। चुने गए वेंडर को कुल 10 लैंडिंग लेग यूनिट्स का निर्माण करना होगा, जो रॉकेट को लैंडिंग के समय स्थिरता और मजबूती प्रदान करेंगे। रॉकेट में लगा ऑनबोर्ड सिस्टम (Onboard System) लैंडिंग के दौरान उसकी गति को धीमा कर देगा और ये विशेष पैर रॉकेट को सटीक स्थान पर सुरक्षित उतारने में मदद करेंगे। भारत की यह नई पहल न केवल अंतरिक्ष विज्ञान में आत्मनिर्भरता (Self-reliance) को बढ़ावा देगी, बल्कि वैश्विक स्पेस मार्केट (Space Market) में भारत के दबदबे को और भी मजबूत करेगी।

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