गुजरात का बदलेगा राजनीतिक नक्शा: लोकसभा और विधानसभा की सीटों में भारी इजाफा
केंद्र सरकार ने नए परिसीमन और महिला आरक्षण अधिनियम-2023 को लागू करने की कवायद तेज कर दी है, जिसका सबसे बड़ा असर गुजरात के राजनीतिक ढांचे (Political Structure) पर पड़ने वाला है। इस नए बदलाव के लागू होते ही गुजरात में लोकसभा की सीटें 26 से बढ़कर 39 होने की संभावना है, जबकि विधानसभा सीटों की संख्या 182 से बढ़कर 273 तक पहुँच सकती है। इस प्रक्रिया (Process) के तहत कई पुरानी सीटों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और कई नई सीटें वजूद में आएंगी। सूत्रों के अनुसार, सरकार की योजना इन सुधारों को 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले अमलीजामा पहनाने की है। इस बदलाव से न केवल सीटों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्रों के भौगोलिक दायरे में भी बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिलेगा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत कुल सीटों में से एक-तिहाई (1/3) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित (Reserved) की जाएंगी। इसके अनुसार, गुजरात की 13 लोकसभा और 91 विधानसभा सीटों पर केवल महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगी। सीटों की इस बढ़ोतरी का सबसे व्यापक प्रभाव अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे बड़े शहरों में देखा जाएगा, जहाँ जनसंख्या घनत्व के आधार पर नई सीटें बनाई जाएंगी। इसके साथ ही राज्यसभा (Rajya Sabha) की 11 सीटों में भी भविष्य में वृद्धि होने की उम्मीद है। यह पहल राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व (Representation) को बढ़ाकर एक नए लोकतांत्रिक युग की शुरुआत करेगी। विशेष रूप से अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों के समीकरण भी नए सिरे से निर्धारित किए जाएंगे, जिससे राज्य का पूरा चुनावी परिदृश्य (Electoral Landscape) बदल जाएगा।

