भारत को बड़ा आर्थिक झटका: ट्रंप सरकार ने रूसी कच्चे तेल पर दी गई छूट बढ़ाने से किया इनकार
होर्मुज संकट और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल के बाजार (Crude Oil Market) से भारत के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाते हुए रूसी कच्चे तेल की खरीद पर दी गई अस्थायी प्रतिबंध मुक्ति यानी छूट (Waiver) को आगे बढ़ाने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। इस रियायत की समयसीमा 16 मई 2026 को समाप्त हो चुकी है, जिसे भारत के लिए एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक झटका माना जा रहा है। मार्च 2026 में जब अमेरिका-ईरान संघर्ष चरम पर था और ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने जैसी स्थिति पैदा हुई थी, तब वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए ट्रंप सरकार ने रूस के समुद्री तेल टैंकरों (Oil Tankers) को अस्थायी रूप से छूट दी थी। हालांकि, यूरोपीय देश इस फैसले का लगातार विरोध कर रहे थे, क्योंकि उनका मानना था कि तेल की बिक्री से मिलने वाले करोड़ों डॉलर का उपयोग रूस अपने युद्ध कोष (War Fund) को मजबूत करने के लिए कर रहा है। इसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकते हुए आखिरकार अमेरिका ने इस रियायत को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
इस कड़े फैसले के कारण अब भारत के लिए रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ने की पूरी आशंका है। वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आने वाली इस नई बाधा के चलते आने वाले दिनों में भारतीय उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ और अधिक बढ़ सकता है। भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां अब तेल आयात के लिए वैकल्पिक देशों की तलाश कर रही हैं, लेकिन मौजूदा पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही अस्थिर बनी हुई हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को अन्य स्रोतों से महंगा तेल आयात करना पड़ा, तो देश के चालू खाता घाटे पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा और आम जनता को ईंधन के लिए अधिक जेब ढीली करनी होगी। सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि घरेलू बाजार में ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को सुनिश्चित किया जा सके।

