ગુજરાત

डॉल्फिन संरक्षण में गुजरात का योगदान महत्वपूर्ण

गांधीनगर, 20 जून : वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा है कि वन्यजीवों के साथ-साथ सबसे सुंदर एवं आकर्षक जलचर जीव ‘डॉल्फिन’ के संरक्षण-संवर्धन में गुजरात ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में जलचर एवं वन्यजीव संरक्षण तथा संवर्धन के विशेष प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2025 की अंतिम गणना के अनुसार गुजरात के 4,087 वर्ग किलोमीटर में फैले समुद्री क्षेत्र में लगभग 680 से अधिक डॉल्फिन दर्ज हुई हैं। वहीं जलचर एवं वन्यजीव पर्यटन क्षेत्र में भी गुजरात ने लंबी छलांग लगाई है। गुजरात के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों शिवराजपुर तथा पोशित्रा का समुद्र तट डॉल्फिन के लिए ‘बेस्ट स्पॉट’ के रूप में भी जाना जाता है। यहाँ पानी बहुत ही स्वच्छ होने के कारण डॉल्फिन सरलता से दिखाई दे जाती हैं।

श्री मोढवाडिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सीधे मार्गदर्शन में गुजरात में वन विभाग ने पिछले 12 वर्षों में समुद्र तट पर मैंग्रोव के साथ-साथ जलचर जीवों के संरक्षण तथा उनके आवास-विकास के लिए अनेक प्रकार के संयुक्त प्रयास शुरू किए हैं। कच्छ की खाड़ी के दक्षिणी भाग में स्थित मरीन नेशनल पार्क तथा मरीन सैंक्चुरी के ओखा से नवलखी तक फैले 1,384 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सर्वाधिक 498 डॉल्फिन होने की संभावना है, जबकि कच्छ की खाड़ी के उत्तरी भाग में कच्छ वृत्त अंतर्गत 1,821 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 168, भावनगर के 494 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 10 तथा मोरबी के 388 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 4 डॉल्फिन देखी गई हैं। इस प्रकार; कच्छ की खाड़ी में स्थित भारत का यह प्रथम समुद्री राष्ट्रीय उद्यान डॉल्फिन का मुख्य घर है।

उन्होंने कहा, “स्वस्थ इकोसिस्टम के लिए डॉल्फिन बहुत ही महत्वपूर्ण जलचर प्राणी है। समुद्री स्तनधारी प्राणियों के कुछ शीर्ष शिकारी खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और समुद्री इकोसिस्टम में संतुलन सुनिश्चित करने में भी सहायता करते हैं। इन डॉल्फिनों को बचाने में कच्छ से भावनगर तक समुद्र में मछली पकड़ने का कार्य करने वाले मछुआरे भाइयों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इन सर्वग्राही प्रयासों के परिणामस्वरूप गुजरात के समुद्र तट पर दिखाई देने वाली डॉल्फिन देश-विदेश के पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केन्द्र बनी हैं।” उन्होंने जोड़ा कि डॉल्फिन लुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल होने के कारण उनका शिकार करना या उन्हें नुकसान पहुँचाना गैर-जमानती अपराध है।

गुजरात में दिखाई देने वालीं डॉल्फिन की विशेषताएँ

गुजरात के समुद्री क्षेत्र में मुख्यतः इंडो-पैसिफिक हम्पबैक डॉल्फिन तथा बॉटलनोज डॉल्फिन; इन दो प्रकार की डॉल्फिन सबसे अधिक दिखाई देती हैं। हम्पबैक डॉल्फिन अधिकतर अरब सागर में पाई जाती हैं। इसे इसकी विशिष्ट कूबड़ और विस्तारित डॉर्सल फिन अर्थात् पूँछ से पहचाना जा सकता है। डॉल्फिन अपने मैत्रीपूर्ण एवं जिज्ञासु स्वभाव के लिए जानी जाती है। डॉल्फिन कई बार लहरों में उछलती-कूदती और खेलती हुई दिखाई देती है, जो पर्यटकों को अपने एक्रोबैटिक प्रदर्शन से आनंदित कर देती है। इसका शरीर आकर्षक तथा इसके मुँह का आकार ‘बोतल’ जैसा होने के कारण इसे आसानी से पहचाना जा सकता है। डॉल्फिन का मुख्य भोजन मछलियाँ, केकड़े और झींगे होने के कारण यह समुद्र तटों और नदीमुखों के पास दिखाई देती है। हम्पबैक डॉल्फिन सामान्यतः 2.5 से 3.2 मीटर लंबी होती है और इसका वजन 150 से 250 किलोग्राम तक हो सकता है।

इसके अतिरिक्त; मछलियों की तरह डॉल्फिन के गलफड़े नहीं होते हैं। वह स्तनधारी प्राणी होने के कारण फेफड़ों से श्वास लेती है। इसलिए वह हर कुछ मिनट में पानी की सतह पर सिर बाहर निकालकर साँस लेने के लिए आती है। यह दृश्य पर्यटकों के लिए रोमांचक अनुभव बन जाता है।

यहाँ उल्लेखनीय है कि भारत का राष्ट्रीय जलचर प्राणी ‘गंगा डॉल्फिन’ है, जो पवित्र गंगा नदी की शुद्धता दर्शाता है। भारत सरकार ने 5 अक्टूबर 2009 को डॉल्फिन को भारत का ‘राष्ट्रीय जलचर प्राणी’ घोषित किया था। साथ ही; डॉल्फिन ‘मानव मित्र जलचर प्राणी’ के रूप में जानी जाती है तथा अपने बौद्धिक-मनोरंजक स्वभाव के लिए लोकप्रिय है। कच्छ से भावनगर तक के समुद्री तटों पर डॉल्फिन को देखना अपार आनंद के साथ रोमांचक अनुभव प्रदान करता है, जो गुजरात सहित देश-विदेश के पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बन रहा है।

ads image

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *