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जंतर-मंतर पर आंदोलन का 11वां दिन: भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) सहित अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन (Protest) मंगलवार को 11वें दिन में प्रवेश कर गया है। परीक्षाओं में जवाबदेही की मांग को लेकर शुरू हुआ यह छोटा सा आंदोलन अब सरकार के खिलाफ एक बहुत बड़े देशव्यापी जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इसी बीच, प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Hunger Strike) पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य ने सबकी चिंताएं बढ़ा दी हैं। उनके अनशन का आज तीसरा दिन है और भीषण गर्मी के बीच कड़े मेडिकल चेकअप में उनका ब्लड शुगर लेवल सामान्य से काफी नीचे गिरकर 66 दर्ज किया गया है। डॉक्टरों की टीम ने चेतावनी जारी की है कि दिल्ली की इस कड़कड़ाती और झुलसाने वाली गर्मी में बिना अन्न-जल के रहना उनके स्वास्थ्य और जान के लिए बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है।

इस संवेदनशील स्थिति के बीच राजनीतिक बयानबाजी ने मामले को और ज्यादा गरमा दिया है। भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता द्वारा आंदोलनकारियों की तुलना कथित तौर पर ‘वायरस’ से करने पर एक नया राजनीतिक विवाद (Controversy) खड़ा हो गया है। इस तीखे बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपक ने पलटवार किया और कहा कि पहले तो शिक्षा मंत्री ने छात्रों को आतंकवादी कहा था और अब पार्टी अध्यक्ष उन्हें वायरस कह रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि वे वायरस नहीं बल्कि सिस्टम की इस बीमारी के खिलाफ एक मजबूत ‘वैक्सीन’ हैं। इधर संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने केंद्र सरकार को सीधे तौर पर अल्टीमेटम (Ultimatum) देते हुए कहा है कि यदि इस कड़कड़ाती धूप में अनशन के दौरान सोनम वांगचुक की सेहत को कोई भी गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो इसकी पूरी और सीधी जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की होगी।

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