ગાંધીનગરગુજરાત

गुजरात में शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल: राज्य की 2,335 सरकारी स्कूलें केवल एक शिक्षक के भरोसे, 2 वर्षों में बंद हुईं 201 स्कूलें

गुजरात में शिक्षा के विकास और बड़े-बड़े अभियानों के दावों के बीच राज्य के शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बेहद चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। ‘वांचे गुजरात’ और ‘शाला प्रवेशोत्सव’ जैसे आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण बच्चों का भविष्य संकट में पड़ता दिख रहा है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में कुल 2,335 प्राथमिक स्कूलें ऐसी हैं जो महज एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रही हैं। देश भर की बात करें तो ऐसे स्कूलों की संख्या 1,00,483 तक पहुंच गई है, जो पूरे भारत में शैक्षणिक बुनियादी ढांचे (Educational Infrastructure) की दयनीय स्थिति को बयां करती है।

रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि पिछले दो वर्षों के दौरान गुजरात में 201 सरकारी स्कूलें स्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं। वर्ष 2023 में राज्य में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या 53,626 थी, जो घटकर वर्ष 2025-26 में 53,425 रह गई है। शिक्षाविदों और अभिभावकों (Parents) का आरोप है कि सरकारी शिक्षा प्रणाली को लगातार कमजोर किया जा रहा है, जिससे निजी स्कूलों (Private Schools) को बढ़ावा मिल रहा है। इस स्थिति के कारण सामान्य और मध्यम वर्ग के परिवारों को अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निजी संस्थानों में भारी-भरकम फीस भरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

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