सावन और त्योहारों में मिलावट का खेल: घी, मावा और सिंदूर में मिलावट पर स्वास्थ्य मंत्री की अपील, ढीली कार्रवाई पर उठे सवाल
सावन के पावन महीने और आने वाले त्योहारों की सीजन में पूजा-अर्चना के लिए इस्तेमाल होने वाले कपूर, कुमकुम (सिंदूर) से लेकर घी और मावे जैसे खाद्य पदार्थों में मिलावट की व्यापक शिकायतें सामने आई हैं। सूरत में हाल ही में सामने आई फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) की घटनाओं के बाद खाद्य सुरक्षा का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने आम जनता से सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बाजारों में मिलने वाले हर घी को शुद्ध मानना सही नहीं है और श्रद्धा के नाम पर भगवान को भी मिलावटी घी अर्पित नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, कुमकुम में हानिकारक केमिकल्स (Chemicals) के इस्तेमाल और बाजार में बिकने वाले बेहद सस्ते घी तथा ‘स्वीट बर्फी’ के नाम पर बेचे जा रहे मिलावटी मावे को न खरीदने की स्पष्ट सलाह दी गई है।
दूसरी ओर, सरकार की इस अपील पर आम जनता और बुद्धिजीवियों द्वारा सवाल भी उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सिर्फ उपभोक्ताओं की सावधानी से मिलावट का यह दूषित खेल खत्म नहीं होगा, बल्कि बाजारों तक मिलावटी सामान पहुंचने ही न देना स्वास्थ्य विभाग (Health Department) की प्राथमिक जिम्मेदारी है। एक तरफ जहां मिलावटखोर धड़ल्ले से नकली सामान बनाकर बेच रहे हैं, वहीं केवल जनता को जागरूक रहने की सलाह देकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से बचता दिख रहा है। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए मिलावटी सामान बनाने, उसकी पैकिंग करने और बेचने वाले पूरे नेटवर्क के खिलाफ नियमित फूड सैंपलिंग (Food Sampling) और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।

