उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार के महंगे होने से बढ़ा FII आउटफ्लो
तेज आर्थिक वृद्धि के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का उत्साह कम देखने को मिल रहा है। बर्नस्टीन रिसर्च (Bernstein Research) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में भारतीय बाजार से लगभग 40 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी बाहर जा चुकी है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि केवल मजबूत जीडीपी ग्रोथ (GDP growth) अब विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है। 2007 के बाद से आर्थिक वृद्धि और विदेशी निवेश के बीच का संबंध कमजोर हुआ है, जिससे यह साफ होता है कि निवेशक केवल आर्थिक विकास दर देखकर निर्णय नहीं ले रहे हैं।
विदेशी निवेशकों (Foreign investors) की चिंता का मुख्य कारण डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर और बाजार का प्रीमियम वैल्यूएशन (Market valuation) है। रिपोर्ट के अनुसार, एफआईआई इनफ्लो और रुपये की चाल के बीच लगभग 72.9 प्रतिशत का मजबूत संबंध देखा गया है। यदि शेयर बाजार में बढ़त के बावजूद रुपया डॉलर की तुलना में कमजोर होता है, तो डॉलर में रिटर्न (Dollar returns) घट जाता है। इसके अलावा, 2020 के बाद से अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार लगातार महंगा रहा है, जिसके कारण जब भी वैल्यूएशन अधिक लगा, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मुनाफावसूली कर अपना पैसा वापस खींच लिया।

