गुजरात में भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण की समस्या गंभीर, 1 करोड़ से अधिक भूमि बंजर होने की कगार पर
गुजरात में भूमि का क्षरण (Soil erosion), बढ़ता खारापन और मरुस्थलीकरण (Desertification) की समस्या बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गई है। इन कारणों से राज्य में 1 करोड़ से अधिक जमीन बंजर और उपजाऊ न रहने की प्रक्रिया का सामना कर रही है, जिससे कृषि क्षेत्र पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। तटीय क्षेत्रों में भूजल के अत्यधिक दोहन (Groundwater depletion) के कारण बढ़ती खारास और अनियमित मौसम से मिट्टी की उर्वरता तेजी से घट रही है। पिछले आठ से दस वर्षों के छोटे अंतराल में ही राज्य के मरुस्थलीय और बंजर क्षेत्रों में लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
गुजरात में समुद्र का खारा पानी घुसने से भाल, सौराष्ट्र और कच्छ की जमीन लगातार खारी हो रही है, जिसके चलते महाराष्ट्र और राजस्थान के बाद मरुस्थलीकरण के मामले में गुजरात तीसरे स्थान पर है। दूसरी तरफ, अनियंत्रित औद्योगीकरण और तीव्र शहरीकरण (Urbanization) का सीधा असर कृषि भूमि पर पड़ा है, और पिछले पांच वर्षों में राज्य की लगभग 2.28 लाख हेक्टेयर उपजाऊ जमीन गैर-कृषि (Non-agricultural land) में बदल चुकी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते जैविक खेती (Organic farming), माइक्रो-इरिगेशन (Micro-irrigation) और व्यापक वृक्षारोपण जैसे ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में गंभीर खाद्य संकट पैदा हो सकता है।

