सुप्रीम कोर्ट ने सोमनाथ मंदिर के पास मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध हटाने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी खानपान पर लगे प्रतिबंध को हटाने से साफ इनकार कर दिया है और गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) के आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है। हाईकोर्ट ने पहले मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन पकाने, बेचने और भंडारण करने पर रोक लगाई थी, जिसे चुनौती देते हुए रेस्टोरेंट मालिकों (Restaurant owners) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि देश में बड़ा हिस्सा मांसाहार का सेवन करता है और इस प्रतिबंध से उनका व्यवसाय चौपट हो जाएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर मामले में संतुलन (Balance) बनाए रखना बेहद जरूरी है और अदालत ने हाईकोर्ट को इस मामले में जल्द से जल्द अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने हल्की-फुल्की टिप्पणी करते हुए कहा कि त्योहारों के समय मिठाई खाकर रोशनी के पर्व (Diwali) की खुशियां मनाएं और शाकाहारी-मांसाहारी के मुद्दे को फिलहाल किनारे रख दें। यह पूरा विवाद 10 अगस्त को जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए उस अधिसूचना (Notification) से जुड़ा है, जिसमें सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में आने वाली दुकानों और होटलों में मांसाहारी व्यंजनों की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। राज्य सरकार (State government) का तर्क है कि विशेष धार्मिक क्षेत्रों में ऐसे खानपान से श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचती है, जिस पर हाईकोर्ट अब इस मामले की अंतिम सुनवाई करेगा।

