ગુજરાત

स्मार्टफोन का साइड इफेक्ट: रील और शो-ऑफ की चाहत में अपराधी बन रहे बच्चे

गुजरात में बाल अपराध (Juvenile Delinquency) के मामलों में पिछले एक साल में खतरनाक वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 18 वर्ष से कम आयु के कुल 1981 किशोरों को विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में पकड़ा गया है, जिनमें 1963 लड़के और 18 लड़कियां शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब अपराधों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है; जहाँ पहले केवल चोरी या झगड़े के मामले आते थे, वहीं अब सोशल मीडिया (Social Media) के दुरुपयोग, नशीली दवाओं के सेवन और एकतरफा प्रेम में पागलपन जैसी गंभीर शिकायतें बढ़ रही हैं। आज के आधुनिक युग में मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग बच्चों को समय से पहले परिपक्व बना रहा है और उन्हें अकेलेपन (Isolation) की ओर धकेल रहा है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रही है।

अपराध के इस दलदल में किशोरों के फंसने का मुख्य कारण दिखावे की जीवनशैली और रातों-रात शोहरत पाने की लालसा है। इसके अतिरिक्त, पारिवारिक विवाद और संयुक्त परिवारों का टूटना भी बच्चों को मानसिक रूप से अस्थिर कर रहा है, जिससे वे नशा (Addiction) और अपराध की ओर आकर्षित हो रहे हैं। वर्तमान में गुजरात सरकार इन भटके हुए बच्चों के पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए 26 चाइल्ड प्रोटेक्शन होम और 107 चिल्ड्रन होम संचालित कर रही है, जहाँ उन्हें उचित मार्गदर्शन (Counseling) और शिक्षा देकर समाज की मुख्यधारा में वापस लाने का प्रयास किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभिभावक समय रहते बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें तकनीक के सही उपयोग के बारे में जागरूक करें, तो इस गंभीर समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

ads image

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *