UN में भारत का ‘महाशक्ति’ वाला रुख: ईरान के खिलाफ पश्चिमी प्रस्ताव को नकारा, अमेरिका-यूरोप हैरान
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 39वें विशेष सत्र में भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का परिचय देते हुए पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को लेकर पश्चिमी देशों द्वारा लाए गए निंदा प्रस्ताव पर भारत ने सीधे तौर पर विरोध (NO) में मतदान किया है। सामान्य तौर पर भारत ऐसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर तटस्थ (Abstain) रहने की नीति अपनाता था, लेकिन इस बार सीधे ‘नहीं’ का बटन दबाकर भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी विदेशी दबाव में नहीं आएगा। इस मतदान प्रक्रिया (Voting Process) में अमेरिका, जर्मनी और जापान जैसे 25 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जबकि भारत ने चीन और पाकिस्तान के साथ मिलकर इस प्रस्ताव को गिराने के पक्ष में मतदान किया।
भारत के इस ऐतिहासिक कदम के पीछे गहरी भू-राजनीतिक रणनीति (Geopolitical Strategy) छिपी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंध और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘चाबહાર पोर्ट’ (Chabahar Port) जैसी परियोजनाएं भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। भारत ने इस फैसले के जरिए यह संदेश दिया है कि वह किसी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ है। पश्चिमी देशों ने जहां ईरान की कार्रवाई को ‘क्रूर दमन’ बताया था, वहीं भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों (National Interests) को सर्वोपरि रखा है। इस वैश्विक ध्रुवीकरण (Polarization) के बीच भारत का यह कड़ा स्टैंड वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती ताकत और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाता है।

