बड़ा फैसला: दूध, मांस और अंडों में एंटीबायोटिक का खेल खत्म, सरकार ने 37 दवाओं पर लगाई रोक
भारत में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) एक गंभीर स्वास्थ्य संकट (Health Crisis) के रूप में उभर रहा है, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार ने पशुपालन और मत्स्य पालन में उपयोग होने वाली 37 दवाओं पर तत्काल प्रतिबंध (Ban) लगा दिया है। इसमें 18 एंटीबायोटिक्स, 18 एंटीवायरल और एक एंटी-प्रोटोज़ोअन दवा शामिल है। चिंताजनक तथ्य यह है कि दुनिया भर में उत्पादित होने वाली अधिकांश एंटीबायोटिक्स का उपयोग इंसानों के लिए नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों का वजन और उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके कारण बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (Resistant) हो जाते हैं। जब इंसान इन पशु उत्पादों का सेवन करते हैं, तो ये ‘सुपरबग्स’ उनके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे सामान्य संक्रमण (Infection) के इलाज में भी जीवन रक्षक दवाएं निष्प्रभावी साबित होने लगती हैं।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि खाद्य उत्पादों में इन दवाओं का अवशेष मिलना अब दंडनीय अपराध माना जाएगा। चिकित्सा पत्रिका ‘द लैंसेट’ की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अस्पतालों में भर्ती होने वाले 83% मरीजों में ‘मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट’ बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी चुनौती (Challenge) है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशा में कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो वर्ष 2050 तक दुनिया भर में करोड़ों लोग अपनी जान गंवा सकते हैं। वैज्ञानिकों ने किसानों के बीच जागरूकता की कमी और कमजोर बायो-सिक्योरिटी (Bio-security) को इस समस्या की मुख्य वजह बताया है। अब सरकार का जोर प्राकृतिक खेती और पशुओं के लिए सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा देने पर है ताकि मानव स्वास्थ्य को इस अदृश्य खतरे से बचाया जा सके।

