चीन का ‘डी-डॉलाइजेशन’ प्लान: अमेरिकी बॉन्ड बेचकर जमा कर रहा है सोने का पहाड़, ग्लोबल मार्केट में मची हलचल
चीन लगातार अमेरिकी बॉन्ड बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को ‘डी-डॉलाइजेशन’ (De-dollarization) की ओर ले जा रहा है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के हालिया आंकड़ों के अनुसार, चीन ने लगातार 15वें महीने अपने सोने के भंडार में बढ़ोतरी की है, जो अब बढ़कर 74.19 मिलियन ट्रॉय औंस हो गया है। ड्रेगन की इस आक्रामक नीति का प्रमाण यह है कि उसके स्वर्ण भंडार का कुल मूल्य अब 369.58 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता (Geopolitical Instability) और आर्थिक जोखिमों के बीच चीन सोने को एक सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहा है। हालांकि, ऊंचे दामों के कारण दुनिया के अन्य केंद्रीय बैंकों की खरीदारी साल 2025 में 1000 टन के आंकड़े से नीचे रही है, लेकिन चीन अपनी खरीदारी जारी रखकर बाजार का ध्यान खींच रहा है।
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में भी जबरदस्त उतार-चढ़ाव (Fluctuation) देखा जा रहा है। जनवरी में चीन की नीति और सट्टेबाजी के कारण सोने के भाव $5600 प्रति औंस के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए थे, लेकिन यह तेजी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले प्रमुख के रूप में केविन वॉर्श के नामांकन की खबरों ने बाजार के सेंटिमेंट (Sentiment) को प्रभावित किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरकर $4500 के स्तर पर आ गया है। गौर करने वाली बात यह है कि चीन का घरेलू सोने का उपभोग (Consumption) साल 2025 में लगभग 3.75 प्रतिशत घटा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न केंद्रीय बैंकों की कुल खरीदारी पिछले तीन वर्षों की तुलना में कम होकर 863 टन रही है। चीन की यह रणनीति स्पष्ट संकेत देती है कि वह डॉलर की तुलना में सोने को अधिक विश्वसनीय एसेट (Asset) मान रहा है।

