गजेरा बंधुओं को हाई कोर्ट से बड़ा झटका: ₹1900 करोड़ के जालसाजी मामले में FIR रद्द करने की याचिका खारिज, जांच होगी तेज
सूरत के प्रमुख उद्योगपति वसंत गजेरा और उनके भाइयों के खिलाफ चल रहे ₹1900 करोड़ के धोखाधड़ी और जालसाजी (Forgery) मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने गजेरा बंधुओं द्वारा एफआईआर (FIR) रद्द करने के लिए दायर की गई याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले के शुरुआती सबूतों (Primary Evidence) को देखते हुए जांच रोकना न्याय के हित में नहीं होगा। शिकायतकर्ता प्रवीण अग्रवाल का आरोप है कि गजेरा बंधुओं ने फर्जी डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग कर कंपनी में उनकी हिस्सेदारी को 43% से घटाकर मात्र 4.02% कर दिया। साथ ही, मिलेनियम-2 और 4 टेक्सटाइल मार्केट की दुकानों को बेचकर प्राप्त हुई ₹1928 करोड़ की भारी नकदी (Cash) का गबन करने और उसे अन्य प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल करने का भी गंभीर आरोप उन पर लगा है।
गुजरात हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी दर्ज किया कि आरोपियों ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता के परिवार के सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर कर उन्हें निदेशक (Director) पद से हटा दिया और कंपनी रजिस्ट्रार (ROC) के समक्ष झूठे दस्तावेज प्रस्तुत किए। वर्तमान में इस हाई-प्रोफाइल (High-Profile) केस की जांच सूरत पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) द्वारा की जा रही है। हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब जांच की प्रक्रिया में तेजी आएगी और गजेरा बंधुओं की गिरफ्तारी की संभावना भी बढ़ गई है। विभाग द्वारा जल्द ही इस घोटाले से जुड़े अन्य बड़े खुलासों (Revelations) की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे सूरत के व्यापारिक जगत में काफी हलचल मची हुई है।

