રાષ્ટ્રીય

केरल चुनाव के लिए कांग्रेस की महा-बैठक: राहुल गांधी ने सांसदों को टिकट देने से किया इनकार, जीत की संभावना और सर्वे Rating ही बनेगी टिकट का आधार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर केरल विधानसभा चुनाव के लिए केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की एक लंबी बैठक चली, जो देर रात तक जारी रही। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी केरल इकाई द्वारा भेजे गए नामों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने स्पष्ट निर्देश (Instructions) दिया है कि टिकट का वितरण केवल सिफारिश के आधार पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार की सर्वे रेटिंग और उसके जीतने की संभावना (Winnability) पर आधारित होना चाहिए। राहुल गांधी ने उम्मीदवारों के पिछले चुनावी प्रदर्शन और जनता के बीच उनकी छवि को मुख्य मापदंड (Criteria) मानने का आदेश दिया है। इस रणनीतिक रुख से साफ है कि पार्टी इस बार केवल जिताऊ चेहरों पर ही दांव लगाना चाहती है ताकि राज्य में सत्ता वापसी सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में एक बड़ा फैसला लेते हुए राहुल गांधी ने उन 5 सांसदों (MPs) को विधानसभा चुनाव लड़ने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जो राज्य की राजनीति में लौटना चाहते थे। पार्टी का मानना है कि सांसदों को लड़ाने से लोकसभा उपचुनावों का बोझ बढ़ेगा और मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर भ्रम (Confusion) पैदा हो सकता है। हालांकि, टिकट वितरण में के.सी. वेणुगोपाल गुट का दबदबा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जहां पहली सूची के लगभग 60% उम्मीदवार उनके करीबी माने जा रहे हैं। वहीं, रमेश चेन्नीथला और वी.डी. सतीशन गुटों को भी आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Representation) दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि शशि थरूर ने किसी विशेष गुटबाजी या टिकट के लिए दबाव नहीं बनाया है, जिससे पार्टी के भीतर अनुशासन का संदेश गया है।

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