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गुजरात हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तलाक के लिए अब भारत आना जरूरी नहीं

गुजरात हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए प्रवासी भारतीयों (NRI) को आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया में बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपसी सहमति से तलाक के मामलों में एनआरआई पक्षकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। मामला एक ऐसे जोड़े का था जिनकी शादी अप्रैल 2024 में हुई थी, लेकिन मतभेदों के कारण वे केवल छह दिन ही साथ रहे। जब उन्होंने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी, तो अदालत ने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे पति की व्यक्तिगत उपस्थिति का आग्रह करते हुए डिजिटल हाजिरी को अमान्य कर दिया था। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जहाँ जस्टिस जे.सी. दोशी ने फैमिली कोर्ट के कड़े रुख की आलोचना की और इसे एक अतिरिक्त तकनीकी दृष्टिकोण (Technical Approach) करार दिया।

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में जोर देकर कहा कि आधुनिक तकनीक का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को सुगम बनाना है, न कि इसमें अवरोध पैदा करना। अदालत ने माना कि प्रक्रियागत कठोरता (Procedural Rigidity) अक्सर वास्तविक न्याय पाने के मार्ग में बाधा बनती है। इस फैसले के बाद अब विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों को वैवाहिक विवादों के निपटारे के लिए बार-बार भारत आने की अनिवार्य आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उनका समय और पैसा बचेगा। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के पुराने निर्देशों को रद्द करते हुए डिजिटल विकल्प (Digital Option) अपनाने को न्‍यायसंगत बताया। इस ऐतिहासिक निर्णय से अदालतों में लंबित वैवाहिक मामलों के शीघ्र निपटान में मदद मिलेगी और यह न्‍याय प्रणाली में तकनीकी सुधार (Technical Reform) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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