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पीएम मोदी का बड़ा कदम: फोन कॉल के 4 दिन बाद ही श्रीलंका पहुंचा ईंधन, मुश्किल वक्त में भारत ने थामा हाथ

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से वैश्विक सप्लाई चेन (Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर पड़ोसी देश श्रीलंका की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है। श्रीलंका में पेट्रोल और डीजल की भारी कमी होने वाली थी, क्योंकि युद्ध और जहाजों की अनुपलब्धता (Unavailability) के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लायर माल भेजने में असमर्थ थे। ऐसे संकटपूर्ण समय में भारत ने अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत समय पर मदद भेजकर श्रीलंका को बड़ी राहत दी है। कोलंबो में भारतीय हाई कमीशन ने शनिवार (28 मार्च, 2026) को जानकारी दी कि भारत ने श्रीलंका को कुल 38,000 मीट्रिक टन (MT) पेट्रोलियम उत्पादों की सफल डिलीवरी (Delivery) कर दी है, जिसमें 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल शामिल है।

यह महत्वपूर्ण सहायता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच 24 मार्च, 2026 को हुई टेलीफोनिक (Telephonic) बातचीत का परिणाम है। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के युद्ध और ऊर्जा सहयोग (Energy Cooperation) पर विस्तृत चर्चा की थी, जिसके बाद भारत सरकार ने लंका आईओसी (LIOC) के माध्यम से यह आपूर्ति सुनिश्चित की। इससे पहले श्रीलंका ने सिंगापुर और खाड़ी देशों से ईंधन मंगाने के अनुबंध (Contracts) किए थे, लेकिन वहां के सप्लायरों ने हाथ खड़े कर दिए थे। भारत के इस कूटनीतिक (Diplomatic) प्रयास और त्वरित कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखने में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और श्रीलंकाई विदेश मंत्री विजिता हेरथ के बीच हुई बातचीत ने भी इस रेस्क्यू सप्लाई (Rescue Supply) के मार्ग को प्रशस्त करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

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