भीषण गर्मी और कम बारिश: साल 2026 में जल संकट गहराने के आसार, मौसम वैज्ञानिकों ने जताई आशंका
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर चिंताजनक पूर्वानुमान (Forecast) जारी किया है, जिसके अनुसार इस साल देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक, जून से सितंबर के दौरान कुल वर्षा लंबी अवधि के औसत (LPA) का केवल 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो ‘बेलो नॉर्मल’ (Below Normal) श्रेणी में आता है। आंकड़ों के अनुसार, वास्तविक बारिश 87 से 97 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जो कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई पूरी तरह मानसून पर निर्भर है, वहां फसलों के उत्पादन (Production) पर इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जून के बाद अल नीनो (El Nino) जैसी स्थितियां विकसित हो सकती हैं, जो आमतौर पर भारतीय मानसून को कमजोर करने का काम करती हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि हिंद महासागर में ‘इंडियन ओशन डायपोल’ (IOD) के सकारात्मक (Positive) होने की संभावना है, जो अल नीनो के बुरे प्रभावों को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है। इसके बावजूद, देश के कई हिस्सों में प्रचंड गर्मी और पानी की कमी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। जबकि उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश हो सकती है, लेकिन मध्य भारत और मानसून आधारित क्षेत्रों में कम बारिश के चलते जल प्रबंधन (Water Management) और कृषि योजनाओं को अभी से तैयार करने की आवश्यकता है।

