आसाराम को हाईकोर्ट से बड़ा झटका: उम्रकैद की सजा रहेगी बरकरार, राहत देने से साफ इनकार, अदालत ने दिया तुरंत सरेंडर करने का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने जोधपुर आश्रम में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे आसाराम की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ यानी डिवीजन बेंच (Division Bench) ने इस मामले में आसाराम सहित तीन आरोपियों द्वारा दायर की गई अपीलों पर अपना फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय ने आसाराम को किसी भी प्रकार की कानूनी राहत देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है और वर्तमान में पैरोल पर जेल से बाहर चल रहे दोषी को तत्काल अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण यानी सरेंडर (Surrender) करने का कड़ा आदेश जारी किया है।
अदालत ने मामले की गहन सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट किया कि तकनीकी रूप से सामूहिक दुष्कर्म यानी गैंगरेप (Gangrape) की धारा के तहत जुर्म पूरी तरह साबित नहीं होता है, इसलिए आसाराम को उस विशिष्ट आरोप से बरी कर दिया गया है। हालांकि, पोक्सो कानून और अन्य गंभीर धाराओं के तहत अपराध पर्याप्त रूप से सिद्ध होने के कारण उनकी मुख्य सजा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में हुए इस घटनाक्रम के बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और वर्ष 2018 में एक विशेष अदालत (Special Court) ने आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी के साथ मामले के अन्य सह-आरोपियों, शिल्पी और शरदचंद को भी हाईकोर्ट से आंशिक राहत मिली है, लेकिन आसाराम के लिए इस आदेश के बाद दोबारा सलाखों के पीछे जाना तय हो गया है।

