રાષ્ટ્રીય

संसद में ‘नंबर गेम’ की हलचल: लोकसभा की सीटें बढ़कर हो सकती हैं 850

केंद्र सरकार आज संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ सहित तीन अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक (Bills) पेश करने जा रही है, जिसका मुख्य लक्ष्य 2029 के चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया को पूरा करना है। इस नए प्रस्ताव के तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 तक किया जा सकता है, जिसमें राज्यों की 815 और केंद्र शासित प्रदेशों की 35 सीटें शामिल होने की संभावना है। हालांकि, इन संवैधानिक सुधारों को पारित करने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जो वर्तमान आंकड़ों के लिहाज से एक बड़ी चुनौती (Challenge) है। लोकसभा में विधेयक पारित कराने के लिए 360 मतों की जरूरत है, जबकि सरकार के पास फिलहाल 293 सदस्य ही हैं।

विपक्ष और कई क्षेत्रीय दलों ने सरकार की इस योजना पर कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित करना चाहती है। विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों ने चिंता व्यक्त की है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनकी संसदीय शक्ति कम हो सकती है और क्षेत्रीय संतुलन (Regional Balance) बिगड़ सकता है। इस बीच, बीजेडी और बीआरएस जैसे दलों के कड़े रुख ने सरकार की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो यह भारतीय लोकतंत्र (Democracy) के इतिहास में सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव होगा, लेकिन इसके लिए सरकार को संसद के दोनों सदनों में विपक्षी दलों को विश्वास में लेकर कड़ा संघर्ष (Struggle) करना होगा।

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