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रूस का भारत को खुला समर्थन, “जितना चाहोगे उतना मिलेगा तेल”

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और अमेरिकी प्रतिबंधों की धमकियों के बीच भारत और रूस के संबंध एक नए शिखर पर पहुंच गए हैं। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने स्पष्ट किया है कि उनका देश भारत की ऊर्जा और रक्षा जरूरतों को बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध (Committed) है। उन्होंने आश्वासन दिया कि रूस भारत की मांग के अनुसार कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। अलीपोव ने अमेरिका और यूरोप को ‘अविश्वसनीय भागीदार’ करार देते हुए आरोप लगाया कि वाशिंगटन जानबूझकर भारत-रूस के ऐतिहासिक संबंधों में दरार डालने की कोशिश कर रहा है। पिछले एक महीने में रूस से भारत के तेल आयात में भारी उछाल (Surge) देखा गया है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे का प्रमाण है।

रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग और गहरा हो रहा है। रूस ने पुष्टि की है कि S-400 वायु रक्षा प्रणाली की शेष इकाइयां जल्द ही भारत को सौंप दी जाएंगी, साथ ही भारत पांचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान (Fighter Jets) SU-57 में भी रुचि दिखा रहा है। आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों ने 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब लगभग 95% व्यापार अमेरिकी डॉलर के बजाय दोनों देशों की राष्ट्रीय मुद्राओं (National Currencies) यानी रुपया और रूबल में हो रहा है। रूस अब भारत से कृषि उत्पादों और हाई-टेक मशीनरी के निर्यात को बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है ताकि व्यापार घाटे को संतुलित (Balance) किया जा सके। यह रणनीतिक साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए फायदेमंद है, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में एक नया संतुलन भी पैदा कर रही है।

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