गुजरात हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, करंट से मौत पर कंपनी को देना होगा मुआवजा, कहा— “सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी है”
गुजरात हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले (Judgment) में स्पष्ट किया है कि बिजली जैसी खतरनाक सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी दुर्घटना में जान जाती है, तो बिजली कंपनी मुआवजे (Compensation) के भुगतान की अपनी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती। यह मामला साल 1988 का है, जब सूरत के रांदेर रोड पर दो भाई अपने घर की छत पर टीवी एंटीना ठीक कर रहे थे और लोहे का पाइप हाई-टेंशन लाइन के संपर्क में आने से उनकी मौत हो गई थी। निचली अदालत (Trial Court) ने परिवार को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था, जिसे बिजली कंपनी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
जस्टिस जे.सी. दोषी ने बिजली कंपनी की अपील को खारिज करते हुए कहा कि घरों के ऊपर से गुजरने वाली हाई-टेंशन लाइनें अपने आप में एक बड़ा जोखिम (Risk) हैं। कोर्ट ने माना कि यदि कंपनी ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए तारों को पर्याप्त दूरी पर रखा होता, तो इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था। बिजली कंपनी की उस दलील को भी खारिज (Reject) कर दिया गया जिसमें उन्होंने मृतकों की लापरवाही का दावा किया था। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए आदेश दिया कि पीड़ितों के परिजनों को तुरंत मुआवजा दिया जाए। यह फैसला भविष्य में बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं के मामलों में जवाबदेही (Accountability) तय करने के लिए एक मिसाल साबित होगा।

