રાષ્ટ્રીય

बंगाल में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद विश्वसनीय सहयोगियों ने छोड़ा साथ

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक दशक से अधिक समय से चला आ रहा ममता बनर्जी का प्रभाव अब समाप्त होता नजर आ रहा है। साल 2026 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत प्राप्त किया है, जिससे राज्य में नए राजनीतिक युग की शुरुआत हुई है। सत्ता परिवर्तन के साथ ही मुख्यमंत्री के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों और सलाहकारों (Advisors) के समूह में भगदड़ मच गई है। मुख्यमंत्री के सबसे खास और पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय ने 5 मई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गौरतलब है कि अलापन वही अधिकारी हैं जिनके लिए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। उनके साथ एक अन्य पूर्व मुख्य सचिव एच.के. द्विवेदी ने भी पद छोड़ दिया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों (Administrative Corridors) में बड़ी हलचल पैदा हो गई है।

अधिकारियों के साथ-साथ सरकार के आर्थिक और कानूनी स्तंभों ने भी अपनी जिम्मेदारियों से हाथ खींच लिए हैं। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार ने नैतिकता (Morality) के आधार पर पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की चुनावी हार के बाद उनके पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसी क्रम में, ममता सरकार का कानूनी पक्ष मजबूती से रखने वाले एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया है। इन सामूहिक इस्तीफों ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल में अब केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरा प्रशासनिक ढांचा (Infrastructure) बदलने वाला है। नई सरकार के गठन से पहले इन दिग्गजों का जाना ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

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